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First Day of College

 November,1,2022 Tuesday First day experience of my college. College ka wo # pehla din, Raas na aaya doston k bin.... #Maano jaisi ki ek alag hi duniya me aagye ho hm.. #Maano jaise ki ek nye se bhawar me kho gye ho hm.. #Alag the #log  alag tha #nazaara... Man ki uljhano ke #Saagar ka na mil rha tha koi #kinaara.... Wo #pehliclass ki pehli ghadi  #Jaise jud gayee ho koi kadi.... Koi tha #strict as p**** sir.. to koi tha #cheezy Koi tha #tough, to koi tha #easy... #4 saal tak jhelna h #engineering ka torture Jiske liye nhi h koi #estimate or nhi h koi #brochure........ ~VIBHA PANDEY

First Day of College

 तो  तारीख थी 25 अक्टूबर  2021, मैने अपनी गाड़ी पार्किंग मे लगायी दद्दु के कहने के हिसाब से क्युकि उस समय मैं गाड़ी चलाना अच्छे से नहीं जानता था। फिर मैने अपने एक स्कूल के दोस्त को फोन लगाया बस ये निश्चित करने के लिए की वो आ रहा कॉलेज या नहीं। असल मे मुझे पता था की वो नहीं आने वाला है पर क्युकि मुझे कॉलेज मे व्यस्त दिखना था इसलिए मैं एक्टिंग कर रहा था। पर फिर मैने अपने स्कूल के दूसरे  मित्र को फोन किया जिसका जवाब ये आया की वो उसके अन्य दोस्तों के साथ आ रहा है और अभी रास्ते मे है। दरसल हम तीनो स्कूल के दोस्तों का एडमिशन एक ही कॉलेज मे हुआ था, या कह सकते है की एडमिशन होने के बाद दोस्त बन गए थे। कहते है ना की पराई जगह पर सबसे कम पराया भी अपना लगने लगता है।  मैं कुछ समय के लिए कॉलेज की लायब्रेरी के सामने खड़ा हो गया। दस मिनट बीते और मेरा दोस्त कुछ अपने दोस्तो के साथ आता है। हम एक दूसरे से मिलते है और कुछ बातें करते है। मुझे सारी बातें तो याद नहीं है पर जो याद है वो एक लड़की के बारे मे थी। उस दिन एक लड़की भी कॉलेज आने वाली थी जिसकी स्कूटी सफेद रंग की होने वाले थी। उन...

" ज़िंदगी है "

 " ज़िंदगी है " ये जिन्दगी है बस एक उलझी पहेली सी , इसी पहेली की उलझने को ढूंढने में, ना जाने कितने पलों को खुद को , सुलझाने में निरंतर लगाए जा रहे हैं हम, आकर्षण से निर्माण तक , सपने से हकीकत तक , औरों से खुद तक , कल से आज तक , हमने पलटे हैं न जाने कितने पन्ने, इस जिन्दगी के किताब के। अब कुछ और अंधेरे देखने है मुसाफिर, कुछ और कांटो से भरे रास्ते देखने है मुसाफिर, बस कुछ और दूर बची है तेरी मंजिल, अब बस थोड़ी डोर टू थाम जिंदगी की, थोड़ी डोर तुझे खुद सिखाएगी,  अब बस रोशनी पास है, पक्के रास्ते पास है, अब बस कुछ और अंधेरे देखने है मुसाफिर । किसी लहर सी मुसीबत से बहक जाऊ,  इतना कमजोर तो नहीं है ये जिन्दगी, किसी पुराने किस्से को आज पर हावी होने दे, इतना कच्ची भी तो नहीं है ये जिन्दगी , खुद को खुद की जीत याद दिलाते हुए, खुद की जीत को खुद सच होते देखना है । बस यही उम्मीद जताई नहीं दूसरो को, पर खुद को हर रोज़ तो बताई है ना । कि रुक गई अगर ये कोशिशें तो साथ क्या रहेगा, कि थाम ली अगर ये सब संघर्ष की घड़ियां तो, तो वक्त कैसे बताएगा अपनी पहचान क्या है, कि बस एक कदम आगे है ये सब चाहते।...

आस लाया हुं

।।आस लाया हुं।।  शरण में तेरी बहुत आस लाया हुुं ,”2” बिना कुछ ललए सब कुछ, मैं लाया हुुं. माना की भक्त नहीं हु, मैं उतना काबिल “2” पर दिल मैं तेरा अक़्स लाया हुुं, शरण में तेरी बहुत आस लाया हुुं ,”2” बिना कुछ ललए सब कुछ, मैं लाया हुुं. ना कोई लोभ है ना है कोई इच्छा”2” फिर भी मनोकामना बहुत ख़ूब लाया हुुं. मैं तेरे चरणों में अपना शीश नवाता हुुं शरण में तेरी बहुत आस लाया हुुं ,”2” बिना कुछ लाएं सब कुछ, मैं लाया हुुं. सुना था मिलोगे ढ़ूुंढने पे कही भी कभी भी,”२” मैं अंतर्मन में शोध करके आया हुुं।। मैं तेरे चरणों मेंअपना शीश नवाता हुुं शरण में तेरी बहुत आस लाया हुुं ,”2” बिना कुछ लाए सब कुछ,  मै लाया हुुं.                          ~ Akhilesh Kumar Kanik

मैं लहराता उन साँसो से, जो सरहद पर भीड़ जाती है

मैं लहराता उन साँसो से  जो सरहद पर भीड़ जाती है मेरा अस्तित्व बचाने  खुद को जो क़ुर्बान कर जाती है  मेरे ख़ातिर ये अपनो को  घन घोर सी पीड़ा दे जाती है  मैं लहराता उन साँसो से  जो सरहद पर भीड़ जाती है एक नए भारत के लिए  अपनो से भी जुदा हुए वो  अपने घर को अनाथ करके  मेरा आँगन सज़ा गये वो   मैं लहराता उन साँसो से  जो सरहद पर भीड़ जाती है सौ सालो तक क़ैदी थी में  आज़ादी मुझको दिला गये वो  मेरा स्वाभिमान बचाने  खुद की जाने मिटा गये वो                           ~   By Sukanya Shidhaye

मेरे दादा की आजादी

  एक रोज बैठा आंगन में, पंछी उड़ता देख गगन में, दादा जी से में फरमाया, लाय दो इक पंछी पिंजड़ में। दो सयानी आंखों ने, मुझ पे कुछ ऐसे गौर किया, किसी बच्चे की गुड़िया को मैंने जैसे मार झपाटा चोर लिया। उलझन थी मन में की दादा, गुस्सा होंगे या नाराज़, महंगी होती होगी चिड़िया, या फिर है कुछ और ही राज़। दादा ने फिर चुप्पी तोडी, और मेरी ये आंखें खोली, बंधन के दुख को बतलाया, बड़े प्रेम से यूं समझाया। आजादी की खुशबू में, पंछी जो चहचहाता है, पिंजड़े के बंधन में आ के, कितना वो फड़फड़ाता है। आज़ादी पाने को जैसे, वो उन दिनों तरसते थे, आज़ादी की सांसे लेने, पल पल को तरसते थे। कितनी नदियां खून बहा के, कितने तन को धूल बना के, मिली थी उनको आजादी, मेरे दादा की आजादी। अपनों को मरते देखा, हर तरफ थी फैली बरबादी, इन सब को सहकर ही आई थी, मेरे दादा की आजादी। आज जो इस पंछी को मैंने, बांध के पिंजड़े में डाला, उसी वेदना को भोगेगा, वो नन्हा पंछी बेचारा। अ अनार, आ आम का पढ़ते, आ आजादी का भूल न जाना, आज़ादी पाने खातिर की, कुर्बानी को भूल न जाना। याद रहे वो अमर जवान, जो भू पर है कुर्बान हुए, उन माताओं को नमन, जिनक...

FEW LIFE LESSONS THAT YOUR COLLEGE LIFE TEACHES YOU

As college students, we all experience many changes in our lives, from forming enduring friendships to forming fresh routines. But now is the time when we all learn a lot of lessons, especially in terms of life. College life is not merely just studying and studying. It’s about balancing everything and growing. Here are a few life lessons which we all need to remember: NOTHING/NO ONE IS PERMANENT: I'm even bringing this up because in college we meet a tonne of new people, make friends, and some even become our close friends. Though keep in mind that everything is fleeting. Only the wisdom you acquire and the knowledge you already possess will endure. nothing more. SELF-STUDY : Once you graduate from college, you'll have learned the art of self-study. In order to complete your studies, you cannot solely rely on experts or faculties. Your status as a school student has ended.     LIVE A MEANINGFUL LIFE : We are often exposed to a new environment where we forget t...