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विद्रोह : जब देश को खतरा हो गद्दारों ... | Poem on Republic Day



जब देश को खतरा हो गद्दारों से

तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का
तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है


जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में
तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है
जब नारी खुद को असहाय पाए
तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश
तो फिर सुभाष का आना जरूरी है
जब सीधे तरीकों से देश न बदले
तब विद्रोह जरूरी है

और जब देश के युवा भूल रहे हो आजादी की कीमते
तो उनको ये गणतंत्र राज्य कैसे बना ये बताना जरूरी है
इसलिए हम सबको गणतंत्र दिवस मनाना जरूरी है।

~ Aman Vishwakarma 




 72-75 वर्ष क्या गुजरे, हम सब ये भूल गये । 

क्यों मारी आजाद ने गोली , क्यों भगत सिंह फांसी पे झूल गये।


लोग भूले हैं शहीदों के घरो की आयी आँधी को। 

सुभाष को भूले है  ये भूल गये है गाधी को || 


आधुनिकता के आलसी भूल गये, डायर की उस मनमानी को।

जहा हसकर फेंक दिया, हजारों ने अपनी जवानी को । 


याद न होगा सन् 57, स्वतंत्रता की अगामी को। 

मंगल को ये भूल गये, भूल गये झाँसी की रानी को । 


ये भूल गये कैसे इस बलिदानी युग का अंत हुआ।

कैसे देश स्वतंत्र और कैसे निर्मित गणतंत्र हुआ ||


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फूलो सा मुस्कुराता हमारा वतन रहे, 

फूलो सा मुस्कुराता हमारा वतन रहे। 

तारो सा जगमगाता हमारा वतन रहे, 

हम बुलबुले है इसके ये हमारा चमन है, 

हम बुलबुले है इसके ये हमारा चमन है, 

मुझे सबसे प्यारा ये मेरा वतन है | 


दिल से निकलेगी ना मर कर ये वतन की उल्फत, 

दिल से निकलेगी ना मर कर ये वतन की उल्फत | 

मेरी मिट्टी से भी ये खुशबू ये वफा आएगी, 

सारे जहा से अच्छा ये हिंदुस्तान हमारा, 

सारे जहा से अच्छा ये हिंदुस्तान हमारा | 

हम बुलबुले है इसके ये गुलसिता हमारा |  

Fardin Khan 
3rd Semester 
Mechanical Branch 



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